अपमिश्रित मिथ्याछाप घी बेचने वाले आरोपी को 9 माह का सश्रम कारावास। 

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मनासा। श्री धर्म कुमार, न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी, मनासा द्वारा एक आरोपी को अपमिश्रित मिथ्याछाप घी बेचने के आरोप का दोषी पाकर कुल 9 माह के सश्रम कारावास और 1,500रू. के जुर्माने से दण्डित किया।
श्री योगेश कुमार तिवारी, एडीपीओ द्वारा घटना की जानकारी देते हुए बताया कि लगभग 08 वर्ष पूर्व दिनांक 10.02.2011 को दोपहर के लगभग 02.50 बजे खाद्य निरीक्षक राजू सोलंकी नियमित निरीक्षण हेतु फर्म पारसमल नाथूलाल, बस स्टेण्ड, कंजार्ड़ा, तहसील मनासा पर पँहुचे, जहॉ पर विभिन्न किस्म की किराना सामग्रीयों का विक्रय किया जा रहा था। खाद्य निरीक्षक द्वारा इनकी शुद्धता पर संदेश होने से उनके द्वारा फर्म के स्वामी से देवशक्ति घी के 3 पैकेट प्रत्येक 200 ग्राम वजनी के नमुने जॉच हेतु 150रू. नकद भुगतान कर लिया गया तथा उनको जॉच हेतु लोक विश्लेषक, राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, ईदगाह हिल्स, भोपाल भेजा गया, जहॉ से प्राप्त जॉच रिपोर्ट में नमूनो को अपमिश्रित एवं मिथ्याछाप होना पाया गया, जिस कारण फर्म के स्वामी पारसमल भण्डारी के विरूद्ध न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया गया।
अभियोजन की ओर से श्री योगेश कुमार तिवारी, एडीपीओं द्वारा न्यायालय में खाद्य निरीक्षक एवं अन्य आवश्यक गवाहों के बयान कराकर आरोपी द्वारा अपमिश्रित मिथ्याछाप देवशक्ति घी का भण्डारण व विक्रय किये जाने अपराध को प्रमाणित कराकर, तर्क दिया गया कि आरोपी द्वारा अपमिश्रित मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक घी का विक्रय किया जा रहा था, इसलिए आरोपी को कठोर दण्ड से दण्डित किया जाये। श्री धर्म कुमार, न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी, मनासा द्वारा आरोपी पारसमल पिता नाथूलाल भण्डारी, उम्र-62 वर्ष, निवासी-ग्राम कंजार्ड़ा, तहसील मनासा, जिला नीमच को खाद्य अपमिश्रण अधिनियम 1954, की धारा 7(1) सहपठित धारा 16(1)(ए)(1), में 6 माह के सश्रम कारावास एवं 1,000रू के जुर्माना तथा धारा 16(1-सी) में 3 माह के सश्रम कारावास एवं 500रू के जुर्माना, इस प्रकार आरोपी को कुल 9 माह के सश्रम कारावास एवं 1,500 रू. के जुर्माने से दण्डित किया गया। न्यायालय में शासन की ओर से श्री योगेश कुमार तिवारी, एडीपीओ द्वारा पैरवी की गई।

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