करोडों की सीवर लाइन योजना में धांधली का मुद्दा पहुंचा भोपाल…

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नीमच। शहर में करोडों की लागत की योजना के नाम पर सीवरेज लाइन में की जा रही धांधली अब नगरपालिका के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के जी का जंजाल बनने वाली है। अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और ठेकेदारों के गठजोड के चलते इस योजना में खुलकर अनियमितताएं की गई हैं। अब तक इस मामले को बेहद सामान्य लिया जा रहा था लेकिन अब मामला न केवल राजधानी तक बल्कि आर्थिक अपराध अनुसंधान प्रकोष्ठ को भी पहुंच गया है। इस मामले में जल्द बडी कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है जिसमें अधिकारियों से लगाकर जनप्रतिनिधियों पर भी गाज गिर सकती है। गौरतलब है कि नीमच में अमृत सिटी प्रोजेक्ट के तहत करोडों की लागत की गंदे पानी की निकासी के लिए योजना स्वीकृत की गई, जिसमें सीवरेज लाइन अलग से पूरे शहर में डाली जाना है। जनता रोज चिल्ला रही है कि सीवरेज लाइन के नाम पर मनमाने ढंग से खुदाई की जा रही है, घरों से निकलने वाली गंदगी के लिए अलग गैस पाइप लाइन भी नहीं डाली गई, सीवरेज लाइन न केवल चैक हो रही है बल्कि जगह-जगह से लीकेज भी हो रही है। बता दें पांच दशक पहले की जाजूसागर जल परियोजना को अब तक लोग याद करते हैं जबकि हाल ही में निर्मित जल आवर्धन योजना और सीवरेज, डेृनेज प्रोजेक्ट ने आम नागरिकों का जीना मुहाल कर दिया है। इस पूरे काम में अधिकारियों की कोई माॅनिटरिंग नहीं है जबकि मोटे माल के चक्कर में जनप्रतिनिधि सब आंख मूंदकर देख रहे हैं। यह भी नहीं सोचा जा रहा है कि योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश के प्रत्येक शहर को बेहतर व्यवस्था देने के लिहाज से डृीम प्रोजेक्ट में शामिल है। मोदी की भाजपा के ही नपा में बैठे जनप्रतिनिधि यह भी ध्यान नहीं दे रहे हैं कि नगरपालिका चुनाव फिर सिर पर है। ऐसे में जनता के साथ खिलवाड और सरकारी योजनाओं की राशि में खुली गडबडियां उन्हें कितनी भारी पड सकती है।

योजना की यह है फजीहत-
सीवरेज प्रोजेक्ट की लागत 62 करोड रुपए है। योजना का ठेका पीसी स्नेल कंपनी गुजरात को दिया गया है। इस योजना का कार्य नवंबर 2018 में पूरा होना था लेकिन तय अवधि में योजना का काम आधे शहर में भी नहीं हुआ। नपा के इंजिनियर एनआर मंदारा बताते हैं कि इस प्रोजेक्ट की अवधि 28 फरवरी 2019 तक बढाई जा चुकी है, इस बार भी योजना पूरी नहीं होती है तो फिर अवधि बढाई जाएगी। यानि इस प्रोजेक्ट में ठेकेदार की मनमानी पूरे चरम पर है। जनप्रतिनिधियों की अनदेखी खास तौर पर देखने जैसी है।

अब इस मामले में नगरपालिका के जनप्रतिनिधि, अधिकारी और ठेकेदार की भूमिका जब संदेह के घेरे में आ रही है तो कांग्रेस भी सीधे तौर पर इस मुद्दे पर दो दो हाथ करने के पक्ष में हैं। शुक्रवार को कांग्रेस पार्षद योगेश प्रजापति इस पूरे मसले पर कलेक्टर आवेदन देकर जांच की मांग करने जा रहे हैं तो भोपाल में इसी मुद्दे पर उच्च स्तरीय जांच की मांग मुख्यमंत्री के सामने पहुंचा दी गई है।

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