कर्मचारियों के संघ की शाखाओं पर जाने पर लगेगा प्रतिबंध

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भोपाल । प्रदेश में कर्मचारियों के आरएसएस की शाखा में जाने पर सरकार जल्द प्रतिबंध लगा सकती है। दरअसल, इस तरह का बैन पहले भी प्रदेश में था, मगर शिवराज सरकार ने इसे हटा दिया था। संघ की शाखा में जाने को लेकर जब-तब विरोध की खबरें सामने आती रहती थीं। 2018 के विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने आरएसएस की शाखा में कर्मचारियों के बैन लगाने का वादा वचन-पत्र में किया था। एक साल तक इस प्रस्ताव पर नफा-नुकसान का आंकलन करने के बाद अब सरकार इस दिशा में आगे बढऩे को तैयार है। कमलनाथ सरकार शासकीय सेवकों के राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की शाखाओं में जाने पर प्रतिबंध लगा सकती है। प्रदेश के गृह विभाग ने जानकारी जुटाना शुरू कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में वर्ष 2002 में कर्मचारियों के संघ की शाखाओं में जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था, किंतु भाजपा की सरकार बनने के बाद वर्ष 2006 में इस प्रतिबंध को खत्म कर दिया था। सरकार पर दबाव बढ़ रहा था इसलिए सरकार अब कोई कोताही नहीं बरतना चाहती है। मुख्यमंत्री जल्दी ही इस नियम को मंजूरी दे सकते हैं।

पहले भी लग चुका है प्रतिबंध-
ऐसा नहीं है कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार संघ को लेकर पहली बार इस तरह का कोई आदेश जारी करने की तैयारी में है। इससे पहले दिग्विजय सरकार के समय भी संघ की शाखाओं में सरकारी कर्मचारियों के जाने पर रोक लगाई गई थी। दिग्विजय सिंह के सीएम रहते हुए सरकार ने एक आदेश जारी किया था जिसमें कहा गया था कि आरएसएस व ऐसी संस्थाओं के कार्यकलापों में भाग लेना या उससे किसी रूप में सहयोग करना मप्र सिविल सेवा (आचरण) नियम का उल्लंघन माना जाएगा।

गुजरात में भी कई वर्षों से यह प्रतिबंधित-
राज्य सरकार इसके लिए केंद्र सरकार के नियमों का अध्ययन करा रही है। केंद्र में अखिल भारतीय स्तर के समस्त सेवाओं कर्मचारियों पर संघ की शाखाओं में शामिल होने व उससे जुड़ी गतिविधियों के संचालन पर प्रतिबंध है। कई राज्यों में भी इसी तरह का प्रतिबंध लगा हुआ है। गुजरात में पिछले 24 वर्षों से ज्यादा समय से भाजपा की सरकार है, पर वहां भी कर्मचारियों के संघ की शाखाओं में शामिल होने पर प्रतिबंध है। इसी तरह कई राज्यों में भी संघ की शाखा में कर्मचारियों के जाने पर सरकारों ने प्रतिबंध लगा रखा है। अब मप्र भी इस कतार में शामिल होने वाला है।

कांग्रेस के वादे पर भाजपा ने जताया था कड़ा ऐतराज-
चुनाव से ठीक पहले जब कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में लोगों से यह वादा किया था तो भाजपा ने कड़ा ऐतराज जताया था, वहीं कांग्रेस ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए व गुजरात में भी इस फैसले को लागू होने का हवाला देकर भाजपा पर पलटवार किया था।

कमलनाथ सरकार के तर्क-
राज्य सरकार का मानना है कि जब केंद्र व कई राज्यों में संघ की शाखाओं में शासकीय सेवकों के शामिल होने पर प्रतिबंध है तो मप्र में खुली छूट क्यों मिली हुई है। इसलिए वर्ष 2006 के नियम को बदला जाए।
शिवराज ने हटा दी थी रोक
दिग्विजय सिंह सरकार के इस फैसले को बाद में भाजपा के सत्ता में आने के बाद साल 2006 में शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री बनने के बाद समाप्त कर दिया गया था, वहीं कांग्रेस ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया था।

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