कल शहर के रानीलक्ष्मी बाई मार्ग पर ,मना एक अनोखा (बर्थ-डे )

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मनासा :-वैसे तो जब से सोसिअल मिडिया का चलन बड़ा हे ! इससे शहर में ,समाज में , युवाओ में , इसका अलग – अलग प्रभाव देखने को मिलता हे !
सोसिअल मिडिया एक खुला मंच हे यहाँ हर व्यक्ति अपनी बात रखने के लिए स्वतन्त्र हे ! जैसे आज में भी रख रहा हु , और रखता ही आया हु !

मित्रो मनासा नगर में जन्म दिवस मानने की बात आये और भाई प्रेम कुशवाह का नाम जुबां पर ना आये तो , तो ये बेमानी सी होगी क्यों की भाई प्रेम कुशवा्म दिवस मानाने की जो अनुठी परमंपरा मनासा नगर में शुरू की हे ! वो अपने आप में एक मीसाल हे !

*ये थी वो योजना*
भाई प्रेम कुशवाह बचपन से ही हिन्दू वादी छबि , एवं प्रभुः श्री राम के भक्त गो सेवा को अपना धर्म समझने वाले रहे हे !  इन्होने एक सोसिअल मिडिया के माध्यम से एक आव्हान नगर की जनता से किया की क्यों ना हम अपना  या अपनो का जन्म दिवस मनासा नगर की गोशाला में गो माता को  आहार खिलाकर , गो सेवा करके मनाये !  और फिर क्या था धीरे धीरे कारवां बनता गया सदस्य आते रहे और 1 वर्ष में दस्यों ने अपना जन्म दिवस जो माता के बिच आकर मनाया ! और आज भी ये क्रम निरंतर जारी हे !

*अब ऐसे में सवाल ये उठता हे की कल जो बर्थ-डे शहर के व्यस्त-तम चौराहे रानीलक्ष्मी बाई मार्ग पर रात्रि करीब 8:30  पर सेकड़ो लोगो की निगाहो के सामने मना वो बर्थ-डे केसा था ?*

बीती रात्रि की घटना हे , करीब 8:30  का समय हो रहा था , में भी उसी चौराहे पर एक पाव् भाजी के थेले पर बच्चो के लिए पाव् भाजी लेने गया था !  तभी वहां पर 8 से 10 स्कूटी गाड़ी आकर रूकती हे कुछ इंसान  जैसे दिखने वाली प्रजाति के प्रति स्वरूप उन गाड़ियों से उतरते हे !  और उन सभी इंसान रूपी स्वरूपों में से किसी एक का बर्थ-डे मनाते हे !
फिर सभी इंसान चारो तरफ खड़े हो जाते हे और बिच में वो  इन्सान खड़ा होता हे जिसका बर्थ-डे मनाया जाता हे !  इनकी उस समय होने वाली हरकतों को कई महानुभाव देख रहे होते हे !
फीर अचानक बर्थ-डे के लिए लाया गया केक एक भी इंसान नहीं खाता और उस केक को पूरा का पूरा उस इंसान के चहरे पर , हातो पर , कपडो पर लगा दिया जाता हे जिसका बर्थ-डे होता हे ! और ये नजारा वहां खडा हर बुड़ा , बडा ,युवा ,बच्चे दुकानदार सभी देख रहे थे ! *देख कर विचार आया की ये हरकत यदि कोई लडके कर रहे होते तो फिर भी कोई ना कोई तो टोक देता लेकिन यहाँ  तो इंसानो के रूप में लडके नहीं युवतीयां थी !*

*काश की प्रेम भाई की बात इन सभी बच्चों के माता पिता तक पहुँच जाती तो आज ये रात्रि 8:30 पर मनने वाला बर्थ-डे प्रातः काल का जन्म दिवस होता !*

 

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