कांग्रेस और निर्दलीय भाजपा पर पड़े भारी भाजपा उम्मीदवार ओमप्रकाश सकलेचा का हो रहा जबरदस्त विरोध मुख्यमंत्री व भाजपा के ऱाष्ट्रीय महासचिव भी नही बना सके सकलेचा के पक्ष में मौहल

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नीमच (निप्र)। जिले की जावद विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की हालत खराब है। कांग्रेश और निर्दलीय उम्मीदवार भाजपा पर भारी पड़ रहे हैं। वहीं विधायक ओमप्रकाश सकलेचा के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश छलक रहा है।
जावद विधानसभा क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार ओमप्रकाश सकलेचा की राह में सबसे बड़ा रोड़ा भाजपा के नाराज कार्यकर्ता है। आरोप है कि सत्ता में रहते हुए विधायक ओमप्रकाश सकलेचा ने पार्टी के ही निष्ठावान कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के खिलाफ पुलिस ने प्रकरण दर्ज करवाएं। प्रदेश में पार्टी की सत्ता होने के बावजूद अपनी बर्बादी से आहत भाजपा के कार्यकर्ता अब सकलेचा को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाने को आतुर है।
जावद विधानसभा क्षेत्र में भाजपा मुकाबले से बाहर होती जा रही है। एक तरफ जहां दमदारी के साथ कांग्रेस के उम्मीदवार राजकुमार अहीर मैदान में है! तो वही निर्दलिय रूप से समंदर पटेल भी मैदान में है! जो सीधे भाजपा का खेल बिगाड रहे है! वही धाकड समाज का वोट बैक इस बार सीधे काग्रेंस व निर्दलीय प्रत्याशी के पक्ष में जाते दिखाई दे रहा है! अपना जनाधार खिसकते देख भाजपा प्रत्याशी ओमप्रकाश सकलेचा ऩे प्रदेश के मुख्यमंंत्री कोअपने क्षैत्र में बुलाकर अपनी बिगडी छवि को सुधारने का प्रयास किया मगर क्षैत्र में सकलेचा के खिलाफ इतनी नारजगी है की शिवराज सिंह चौहान की सभा में भी एक हजार का आकडा भी नही पहुंच सका 800 आम लोगो के बीच करीब 500भाजपा के कार्यक्रता ही सभा मे देखे गए इसके बाद जब जावद में भाजपा का मौहल नही बना तो सकलेचा ने अपनी कुसी बचाने के लिए ऱाष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवगीय की सभा करवाई मगर वहां भी वे सफल नही हो सके सभा में करीब 1000 लोग भी नही जुटा सके हैअब देखने वाली बात यह होगी कि जावद क्षैत्र के लोगो के मन में पनप रहे आकोश को भाजपा के पदधिकारी सकलेचा के खिलाफ पनपे इस गुस्से को खत्म कर सकलेचा के पक्ष में वातावरण बना सकेगे

धाकड समाज धडा नारज
वही जावद में ओमप्रकाश सकलेचा को लकर धाकड़ समाज का विरोध और लगातार तीन बार से विधायक रहने से पार्टी का एक धड़ा नाराज होने का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। साथ ही जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि पूरन अहीर से अदावत भी सकलेचा को भारी पड़ सकती है और सबसे ज्यादा अपने ही दल के लोगों की नाराजगी। आरोप यह भी है कि क्षेत्र में अपने समकक्ष किसी नेता को सकलेचा ने खड़े नहीं होने दिया। दूसरी तरफ १५ साल की एंटी इनकंबेंसी और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी नुकसान दे सकती है। अऩ्दर ही अऩ्दर एक गुट सकलेचा के खिलाफ काम कर रहा है
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एसएसटी एक्ट
जावद में एसएसटी एक्ट का काफी विरोध रहा है! इसका सीधा असर विधानसभा चुनाव में देखा जा रहा है! जहां बीजेपी के नेताओं का जनसर्पक के दौरान खूब विरोध हो रहा है! तो वहीं दूसरी ओर नोटा समर्थक राजनैतिक दलों को आईना दिखाने की तैयारी कर रहे हैं. एससी, एसटी एक्ट के विरोध में सवर्ण समाज राजनैतिक दलों से खफा हो रहा हैं. इस बार विधानसभा चुनाव में नोटा पर वोट देकर राजनैतिक दलों को वोट की चोट देकर सबक सिखाका इंतजार कर रहा है

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