घर में घुसकर 16 वर्षीय बालिका का बलात्कार करने वाले आरोपी को 12 वर्ष का सश्रम कारावास।

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मनासा। श्री अखिलेश कुमार धाकड़, अपर सत्र न्यायाधीश, मनासा द्वारा एक आरोपी को घर में घुसकार 16 वर्षीय नाबालिक बालिका का बलात्कार करने के आरोप का दोषी पाकर कुल 12 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 1,000 जुर्माने से दण्डित किया।

जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्री जगदीश चौहान द्वारा घटना की जानकारी देते हुए बताया कि घटना लगभग 2 वर्ष पुरानी होकर दिनांक 28.05.2017 को रात्री के 12 बजे ग्राम बेसदा, थाना मनासा की हैं। 16 वर्षीय पीड़िता बचपन से ही उसके मामा के घर पर रहती हैं, घटना दिनांक को उसके मामा व परिवार के सदस्य मौसर के कार्यक्रम में सम्मिलित होने दूसरे गांव गये हुए थे तथा पीड़िता घर में अकेली थी, जिसका फायदा उठाते हुए गॉव का ही रहने वाला आरोपी रात्री को अंधेरे में पीड़िता के घर में घुस आया और उसने पीडिता का मूंह दबाकर उसके साथ बलात्कार किया, जब पीड़िता चिल्लाने में कामयाब हुई, तो उसके पड़ोस में रहने वाली मौसी वहां पर आ गई, जिसको देखकर आरोपी वहां से भाग गया। सुबह पीड़िता द्वारा घटना उसके मामा व माता को बताई, जिसके बाद पीड़िता ने घटना की रिपोर्ट पुलिस थाना मनासा में की, जिस पर से आरोपी के विरूद्ध अपराध क्रमांक 199/17, धारा 456 भादवि व धारा 3/4 पॉक्सों एक्ट अंतर्गत दर्ज किया गया। पुलिस मनासा द्वारा विवेचना के दौरान आरोपी को गिरफ्तार कर शेष आवश्यक विवेचना पूर्ण कर चालान मनासा न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।

अभियोजन की ओर से श्री जगदीश चौहान, जिला अभियोजन अधिकारी द्वारा पीड़िता, उसके परिवार के सदस्य, पीडिता को नाबालिग प्रमाणित करने के लिए स्कॉलर रजिस्टर प्रस्तुत करने वाले प्रधानाध्यापक, पीडिता का मेडिकल परीक्षण करने वाले चिकित्सक सहित सभी आवश्यक गवाहों के बयान न्यायालय में कराकर आरोपी के विरूद्ध घर में घुसकर बलात्कार करने के अपराध को संदेह से परे प्रमाणित कराकर, दण्ड के प्रश्न पर तर्क रखा गया कि आरोपी गांव का निवासी हैं, जिसके द्वारा पीड़िता के घर में अकेले होने के अवसर लाभ उठाकर उसका बलात्कार किया हैं, इसलिए उदाहरणस्वरूप आरोपी को कठोर दण्ड से दण्डित किया जाये। श्री अखिलेश कुमार धाकड़, अपर सत्र न्यायाधीश, मनासा द्वारा आरोपी नन्दलाल पिता कालूजी कीर, उम्र-29 वर्ष, निवासी-ग्राम बेसदा, थाना मनासा, जिला नीमच को धारा 456 भादवि में 2 वर्ष का सश्रम कारावास व 300रु जुर्माना व धारा 3/4 पॉक्सों एक्ट में 10 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 700रू. जुर्माना, इस प्रकार आरोपी को कुल 12 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 1000रू. जुर्माने से दण्डित किया, साथ ही पीड़िता को 1000रू. प्रतिकर के रूप में प्रदान करने का भी आदेश पारित किया। न्यायालय में शासन की ओर से पैरवी श्री जगदीश चौहान, डीपीओ द्वारा की गई।

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