जावद विधानसभा क्षेत्र में राजकुमार एवं समंदर में हो रहा है कांटे का मुकाबला

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विधायक ओम सकलेचा तीसरे पायदान पर होकर जमानत जप्त की ओर …
जावद। विधानसभा चुनाव 2018 की चौसर बिछ चुकी है। जावद विधानसभा क्षेत्र में कुल 8 उम्मीदवार चुनाव मैदान में अपना भाग्य आजमा रहे है। जिनका फैसला क्षेत्र के 165378 मतदाता करेंगे। जिसमें 85230 पुरुष एवं 80148 महिला मतदाता शामिल है। इस चुनाव में भाजपा की ओर से तीन बार के विधायक ओमप्रकाश सकलेचा तो कांग्रेस की ओर से राजकुमार अहीर मैदान में है। इसी के साथ कांग्रेस के बागी समंदर पटेल निर्दलीय रूप से मैदान में है। जिससे मुकाबला त्रिकोणीय होकर रोचक हो गया है। आने वाली 28 नवम्बर को मतदान होगा। इसके ठीक 13 दिन बाद यानी 11 दिसम्बर को किसकी किस्मत चमकेगी और किनकी राजनेतिक रूप से तेरहवीं हो जायेगी यह भविष्य के गर्भ में है। परंतु अब तक जो रुझान मिल रहे हैं और जो समीकरण बन रहे हैं, उससे लगता है कि कांग्रेस के राजकुमार अहीर और कांग्रेस के बागी समंदर पटेल में ही मुख्य मुकाबला होता दिखाई दे रहा है तथा वर्तमान विधायक एवं भाजपा प्रत्याशी ओमप्रकाश सकलेचा तीसरे पायदान पर खिसकते दिखाई दे रहे हैं और उनकी जमानत भी जप्त हो जाए तो कोई आश्चर्य नहीं होगा।
आम जनता राजकुमार अहीर या समंदर पटेल को क्यों पसंद कर रही है और सकलेचाजी को क्यों नकार रही है ? आइए जानते हैं।
आज से 10 वर्ष पूर्व विधानसभा चुनाव 2008 में कांग्रेस ने नीमच निवासी राजकुमार अहीर को अपना उम्मीदवार बनाया था और भाजपा ने पुनः ओम सकलेचा पर भरोसा जताया था। हालांकि उस चुनाव में राजकुमार अहीर को बाहरी होने के तमगे के कारण एवं भेरुदादा के इंजन के कारण हार का सामना करना पड़ा था। परंतु चुनाव हारने के बाद भी वह निराश नहीं हुए और लगातार जनता के संपर्क में रहे। जनता के सुख दुःख में काम आते रहे। दिन हो या रात जब भी किसी ने मोबाइल लगाकर उन्हें पुकारा वे हाजिर हुए। उनकी आक्रमक कार्यशैली और अधिकारियों से काम कराने के तरीके का हर कोई कायल हुआ। वे किसानो, गरीबो, मजदूरो व अन्य निचले तबके के लोगों के हिमायती बनकर उभरे। आम जनता उनको चाहने लगी। यही उनकी सबसे बड़ी पूंजी बनी। परंतु 2013 के चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो वह जनता की मांग पर बागी हो गए और निर्दलीय चुनाव लड़ा परन्तु जीत नही पाये। इस चुनाव में भाजपा के ओम सकलेचा पुनः विजयी हो गए। इसके बाद भी राजकुमार अहीर जनता के बीच बने रहे और जनता की लड़ाई दोगुनी ताकत से लड़ते रहे और उसी के परिणाम स्वरूप कांग्रेस ने इस चुनाव में पुनः राजकुमार अहीर को अपना उम्मीदवार बनाया है। और जिस तरह के रुझान मिल रहे हैं उससे लगता है कि राजकुमार अहीर इस चुनावी वैतरणी को पार कर सकते हैं। जीत का सेहरा उनके सिर पर बंधता दिखाई दे रहा है।
दूसरी ओर इंदौर के ऑटोमोबाइल व्यवसायी समंदर पटेल जो कि धाकड़ जाति से होकर बीते 8 सालों से क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे नीमच जिले चुनाव लड़ रहे सभी उम्मीदवारों में सबसे ज्यादा सम्पन्न अरबपति उम्मीद्वार है। अपने मधुर एवं सौम्य व्यवहार के कारण आमजन में लोकप्रिय है। इंदौर में जावद निवासियों के शिक्षा प्राप्त कर रहे बालक/बालिकाओ एवं हर आम व खास के सुख दुख में काम आते है। बड़े रूप से सम्पन्न होने के बावजूद सबका सम्मान करना एवं अपने से बड़ो को धोग लगाना इनकी कार्यशैली का हिस्सा है। कांग्रेस ने इनको टिकट नहीं दिया तो बागी होकर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। इन्हें इनकी कार्यशैली के कारण जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है। टिकट नहीं मिलने से भी लोगों में इनके प्रति सहानुभूति है और जो रुझान मिल रहे हैं उससे लगता है कि यह भी चुनावी वैतरणी को पार कर सकते हैं। जीत का सेहरा इनके सिर पर भी बंध सकता है।
इनके अलावा अब हम भाजपा प्रत्याशी ओमप्रकाश सकलेचा की बात करते हैं तो वह 15 साल से विधायक हैं। परंतु सत्ताधारी पार्टी भाजपा से जुड़े होने के बावजूद विधानसभा क्षेत्र जावद में कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं कर पाए है। यह पहले चुनाव से ही रोजगार देने का ढिंढोरा पीट रहे हैं परंतु बीते 15 सालों में 15 लोगों को भी रोजगार नहीं दिला पाये है। बड़ी बड़ी बातें करना, बड़ी-बड़ी डींगे हांकना उनकी कार्यशैली का हिस्सा है। आम जनता से सीधे मुंह बात नहीं करना, उलूल जुलूल जवाब देना इनका शगल बना हुआ है। आर्थिक सांठगांठ के चलते अधिकारियों का पक्ष लेना और आम जनता को हड़काना भी उनकी कार्यशैली का हिस्सा है। इस कारण इस बार जनता भी लगभग इनसे ऊब चुकी थक चुकी है। जनता अब बदलाव चाहती है। और जब जनता ठान लेती है तो राजा से रंक बना कर छोड़ती है और फिर कोई कुछ नहीं कर पाता है। इस बार तो सकलेचाजी के चुनाव कार्यालय भी खाली पड़े हैं। भाजपा के निष्ठावान कार्यकर्ता कोई तवज्जो नहीं दे रहे हैं। जो चुनिंदा लोग काम कर रहे उनमे भी कुछ लोग तो पार्टी के कारण मन मारकर मुँह दिखाई कर रहे है, पर इनकी संख्या भी हर जगह उंगलियों पर गिनने लायक है। हाँ चमचे व दलाल किस्म के लोग जिन्होंने सत्ता की मलाई खूब चाटी है, उनमे जरूर जोश दिखाई दे रहा है। परंतु जिस तरह के रुझान मिल रहे हैं, इससे अब यह फटाका फुस्स होता दिखाई दे रहा है। सकलेचाजी तीसरे पायदान पर जाते दिखाई दे रहे हैं और जमानत जप्त की ओर अग्रसर हैं। देखना है क्या होता है।

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