जिला चिकित्सालय संघर्ष समिति ने जिला चिकित्सालय प्रशासन के खिलाफ खोला मोर्चा

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न्यू ईयर पार्टी मामले में नर्सेस के साथ सीएमएचओ और सिविल सर्जन पर भी हो कार्रवाई संघर्ष समिति ने कलेक्टर को कराया जिला चिकित्सालय की खामियों से अवगत
नीमच। ट्रामा सेंटर में मंगलवार को स्टाफ नर्सेस द्वारा न्यू ईयर पार्टी करने के मामले में मचे बवाल के बाद बुधवार को जिला चिकित्सालय संघर्ष समिति ने नवागत कलेक्टर राजीव रंजन मीणा से मुलाकात की। इस दौरान संघर्ष समिति ने कलेक्टर को बताया कि ऐसा संभव नहीं कि ट्रामा सेंटर में स्टाफ नर्स पार्टी करें और जिला चिकित्सालय के जिम्मेदारों को पता न चले। संघर्ष समिति ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंप कर जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन और सीएमएचओ पर कार्रवाई करने बात कही गई। संघर्ष समिति ने कलेक्टर को पिछले 2 वर्ष से जिला चिकित्सालय में फैल रही अव्यवस्थाओं की मय सबूतों के जानकारी दी और बताया कि जिला चिकित्सालय में प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। चिकित्सकों के साथ ही चिकित्सालय का स्टाफ मनमर्जी का मालिक बना हुआ है, जिसके खिलाफ जिला चिकित्सालय संघर्ष समिति बार-बार आवाज उठाती रहती है, पर अव्यवस्थाएं सुधारने का नाम नहीं ले रही है। कलेक्टर से मुलाकात करने के दौरान संघर्ष समिति के अध्यक्ष तरूण बाहेती, भगत वर्मा, मुकेश पोरवाल, संदीप राठौर, आशा सांभर, मनीष चांदना, विनोद बोरीवाल, संजय पंवार, चेतना लालका आदि मौजूद थे।
इस मौके पर नवागत कलेक्टर श्री मीणा को जानकारी देते हुए जिला चिकित्सालय संघर्ष समिति के अध्यक्ष तरूण बाहेती ने बताया कि जिले में स्वास्थ्य सुविधायें पूरे प्रदेश में सबसे बदतर स्थिति में चल रही है । जिला चिकित्सालय संघर्ष समिति पिछले दो वर्षों से लगातार जिला अस्पताल की समस्याओं को उठाती रही है व समस्या हल नहीं होने पर जनता के साथ आंदोलन किये जा चुके हैं। पूर्व के जिला कलेक्टर रजनीश श्रीवास्तव, कौशलेन्द्र विक्रमसिंह ने भी जिला अस्पताल को सुधारने के कई प्रयास किये, किन्तु सभी प्रयास विफल रहे । पिछले कुछ समय से मौजूदा जिला अधिकारी के अस्पताल की व्यवस्थाओं को सुधारने को लेकर जिला अस्पताल संघर्ष समिति से चर्चा कर समय देने की बात कही थी, जिस पर जिला अस्पताल संघर्ष समिति ने मौजूदा अधिकारियों पर भरोसा किया था । किन्तु कल स्टॉफ की लापरवाही की घटना ने पूरी प्रशासनिक व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी। यह घटना पहली बार नहीं हुई है । इससे पूर्व भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं । ज्ञापन में जिला चिकित्सालय नीमच में वर्तमान में प्रशासनिक व्यवस्थाएं पूरी तरह ध्वस्त हैं। सभी डॉक्टर व पूरा स्टॉफ मन-मर्जी का मालिक है। वहां पर न किसी वरिष्ठ अधिकारी की सुनी जाती है और न ही किसी दोषी कर्मचारी पर कार्यवाही की जाती है । पिछले कुछ समय से लगातार डायलासिस मशीन बंद पडी है, गर्भवती महिलाओं को सोनोग्राफी के लिये भी तीन-तीन, चार-चार बार चक्कर लगाने पडते हैं । स्टॉफ की बदतमीजी मरीजों पर हावी है । शिकायत करने पर( डॉक्टर व स्टॉफ हडताल तक की धमकी देते हैं । इस प्रकार की अनेक समस्याएं जिला अस्पताल में हैं, जो अब असहनीय हो चली हैं ।

संघर्ष समिति ने कलेक्टर को बताया कि प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के चलते जिले के ट्रॉमा सेन्टर को महज मरहम-पट्टी करने जैसा अस्पताल बना दिया है । हमने पहले भी कई बार मांग पत्र भेजकर समस्या समाधान के विषय में प्रयास किये थे।
●कलेक्टर ने दिया कार्रवाई का आश्वासन –
जिला चिकित्सालय संघर्ष समिति द्वारा जिला चिकित्सालय के संबंध में कलेक्टर को बताई गई समस्याओं को कलेक्टर ने गंभीरता से सुना और संघर्ष( समिति को मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया ।
●संघर्ष समिति ने कलेक्टर के समक्ष रखे ये बिंदु-
ट्रॉमा सेन्टर के लिये वेन्टीलेटर व अन्य महत्वपूर्ण मशीनरी दो वर्ष पूर्व खरीद ली गई थी, जो कबाड में पडी है । उन मशीनों को अविलम्ब चालू कराकर ट्रॉमा सेन्टर में लगाया जाये ।
वर्तमान सीएमएचओ डॉ. समरथ बघेल व सिविल सर्जन डॉ. बीएल बोरीवाल पर पूर्व में कार्यों में लापरवाही व रिश्वत लेने जैसे मामले साबित हुए हैं, फलस्वरूप जिला प्रशासन द्वारा इनके ऊपर कार्यवाही तक की गई है । इन्हीं अधिकारियों को( वर्तमान में अस्पताल का सर्वेसर्वा बना रखा है, जो प्रशासनिक चूक है । इन्हें हटाकर अनुभवी व मजबूत प्रशासनिक क्षमता वाले अधिकारियों को अस्पताल की जवाबदारी सौंपी जाए।
नीमच जिले की चिकित्सा सुविधाओं में वर्तमान में 330 पद स्वीकृत हैं, किन्तु महज 181 ही पद पर कार्यरत हैं । जिला प्रशासन के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग से रिक्त पदों की पूर्ति करवाई जाए।
वर्तमान में डायलासिस मशीन व सोनोग’ाफी मशीन बंद या खराब होने व स्टॉफ नहीं होने को लेकर अव्यवस्थित है। इन महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं पर गंभीरता से नजर रख इन्हें अविलम्ब लगातार चालू करवाया जाए।
जिला चिकित्सालय में व्यवस्थाओं में सुधार एवं शिकायत निवारण हेतु जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को प्रभारी बनाकर जिला चिकित्सालय में नियुक्त किया जाए। महिला वार्ड हेतु महिला अधिकारी की नियुक्ति की जाए व इनके नम्बर पूरे जिला चिकित्सालय परिसर में लिखवाए जाए।
जिला चिकित्सालय प्रशासन द्वारा प्रसूता विभाग में महिलाओं की डिलेवरी में दूसरी डिलेवरी के अंतर्गत ऑपरेशन पर रोक लगा दी गई है, जिससे महिलाआें को अन्यत्रा बाहर ईलाज के लिये जाना पडता है। यह रोक जिला चिकित्सालय प्रशासन ने खुद की मर्जी से लगा रखी है, जबकि शासन के इस प्रकार के कोई आदेश नहीं हैं। इस रोक अविलम्ब हटाया जाये ।
सम्पूर्ण जिला चिकित्सालय परिसर में सीसीटीवी कैमरे चालू कराये जाए पूर्व जिला कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रमसिंहजी ने ओपीडी पर खुद ऑनलाईन नजर रखने के प्रयास भी किये थे । इस व्यवस्था को पुन: चालू किया जाए ।
जिला चिकित्सालय के महिला वार्ड में विशेषकर प्रसूति के समय प्रसूताओं के परिवारजनों से भारी राशि की मांग की जाती है, इस प्रकार के पूर्व में भी कई मामले उजागर हो चुके हैं। प्रसूताओं से रिश्वतखोरी की अलग से कमेटी बनाकर जांच की जाए।
जिला चिकित्सालय के अधिकारियों एवं स्टॉफ के विरूध्द कई शिकायतो की जांच लम्बित है इसमें शीघ्र जांच पूरी कर दोषी चिकित्सकों के विरूध्द कार्यवाही की जावे तथा पूर्व में पाये गये दोषी चिकित्सकों के विरूध्द भी कार्यवाही की जाये ।
जिला चिकित्सालय में एम्बुलेंस मामलों में कई प्रसूताओं को छोडने व लेने जाने के लिये पैसों की मांग की जाती है, जिसकी जांच की जाये।

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