डोडाचूरा सेंडिकेट: लंबे समय से बाबू सिंधी तस्करी की गतिविधियों में लिप्त

0
12

यह जगजाहिर है कि बाबू सिंधी से जुडे हुए कौन—कौन पुलिसकर्मी है, जय गुरूदेव कोडवर्ड से जय उर्फ बाबू पिता तोलाराम सबनानी की भूमिका आई सामने

37 क्विंटल डोडाचूरा जब्ती गोदाम के आसपास कई बार देखी गई बाबू की काले कलर की फार्चूनर क्रमांक एमपी 07 सीजे 0017

नीमच। पोस्तादाने की आड में बाबू उर्फ जयकुमार पिता तोलाराम सबनानी डोडाचूरा की तस्करी को लंबे समय से अंजाम दिया जा रहा है। जब—जब भी बाबू से संबंधित डोडाचूरा या अफीम की खेप पकडाती है तो वह कुछेक पुलिसकर्मियों की मदद से नाम निकवाने की जुगत में लग जाता है। 37 क्विंटल डोडाचूरा की खेप के मामले में भी बाबू सिंधी की संलिप्तता बताई जा रही है। बाबू सिंधी जो कि कुछेक पुलिसकर्मियों की मदद से तस्करी की गतिविधियों को अंजाम देता आया है, कहने के तो वह पोस्ते का कारोबारी बताता है, पर पोस्ते की आड में डोडाचूरा का बडा तस्कर है। तस्कर मनीष तिवारी के घर से मिली एक डायरी  में कोडवर्ड सामने आया है वह है जय गुरू देव। बाबू सिंधी का मूल नाम जय है। जय नाम से कोडवर्ड सामने आने के बाद बाबू सिंधी डोडाचूरा सेंडिकेट में हलचल देखी जा रही है। इस मामले में और कोई न तो जय है और न ही गुरू या देव। पूरा मामला बाबू सिंधी के ईदगिर्द घूम रहा है। सूत्र बताते है कि ग्वालटोली के समीप स्थित मनीष तिवारी के गोदाम में कई बार बाबू उर्फ जयकुमार सिंधी देखा गया है। वह अधिकांश रात्रि के समय काले कांच की फार्चूनर कार क्रमांक एमपी 07 सीजे 0017 से आता—जाता था और लाईजनिंग करता था वहीं से ग्वालटोली से बरूखेडा होते हुए सीधे हाईवे पर डोडाचूरा से भरे ट्रक या अन्य वाहन जाते थे। यह इलाका नीमच सिटी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। जो कि पूर्व में नीमच सिटी गिरोह के कारण थाना बदनाम था, यहां पर पूर्व में तैनात एनडीपीएस एक्ट करने में माहिर पुलिसकर्मियों को एक—एक कर जिलाबदर कर दिया गया। नीमच सिटी थाने के स्टॉफ को पहले से मनासा पुलिस ने जानकारी नहीं लगने दी और दबिश देकर भारी मात्रा में मनीष तिवारी के गोदाम से डोडाचूरा जब्त किया है। यहां पर सीधे मनासा पुसिल की इंट्री हुई है। ऐसा बताया जा रहा है कि डोडाचूरा का अडडा काफी समय से संचालित हो रहा था। आखिर क्या कारण रहे कि नीमच सिटी थाना पुलिस को इसकी जानकारी नहीं लगी। मनासा टीआई केएल डांगी ने ईमानदार पुलिस कप्तान सूरजकुमार वर्मा तस्करी के इस खेल की जानकारी उपलब्ध करवाई और एसपी साहब के निर्देशन में यह बडी कार्रवाई हुई। इस प्रकरण के बाद नीमच सिटी थाना पुलिस की सक्रियता पर भी प्रश्न चिन्ह खडे हुए है। इस पूरे मामले में नीमच सिटी थाना पुलिस आशंका के घेरे में है, इसलिए इस मामले की जांच अन्य जिलों के पुलिस अधिकारी कर रहे है। बाबू सिंधी जांच को कहीं ओर दिशा में भटकाने का प्रयास कुछेक पुलिसकर्मियों से मिलकर करने में जुटा हुआ है।
बाबू उर्फ जय सिंधी की संलिप्तता की जांच में होंगे खुलासे—
यह जगजाहिर है कि बाबू उर्फ जय सिंधी के साथ कौन—कौन पुलिसकर्मी रहते है और खाकी के साथ रहकर यह किस तरह से तस्करी की गतिविधियों को अंजाम देता है। नीमच जिले से जिलाबदर किए गए कुछ पुलिसकर्मी पहले बाबू सिंधी के सुरक्षा कवच बने हुए थे, अब कोई और दूसरे है। नारकोटिक्स विंग से जुडे हुए कुछेक कर्मचारी भी बाबू के साथ देखे गए है। बाबू सिंधी की एक माह की मोबाईल  कॉल डिटेल्स सीडीआर, मोबाईल टॉवर, मनीष तिवारी के गोदाम के आस—पास लगे सीसीटीवी कैमरे, मनीष तिवारी के गोदाम में आने—जाने वाले व्यक्तियों की डिटेल्स, मनीष तिवारी, मौके से पकडाए चौकीदार और हाल ही में पकडाए तस्कर संपत सहित अन्य की कॉल डिटेल्स निकालने पर कई चौकाने वाले तथ्य सामने आएंगे। और बाबू सिंधी दोनों की कॉल डिटेल्स, पुलिस को मिली डायरी में एक—एक कोडवर्ड की जांच—पडताल तस्करी के पूरे सेंडिकेट का खुलासा करेेगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here