तस्कर दीपक सिंहल ने हरियाणा जेल में बंद रहते हुए तस्करों से बना ली थी दोस्ती, वही दोस्ती बाद में कुख्यात तस्कर बाबू सिंधी के साथ मिलकर व्यापार में बदली, डोडाचूरा की खेप हरियाणा पहुंचाने का जिम्मा दीपक सिंहल के जिम्मे था, केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की पूछताछ में उगल रहा बाबू कई राज

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नीमच। कुख्यात तस्कर बाबू उर्फ जयकुमार सिंधी से जो—जो लोग जुडे हुए थे, किन—किन लोगों के साथ मिलकर यह मंडी कारोबारी की बाड में डोडाचूरा, धोलापाली, अफीम के कालेदाने की तस्करी का गिरोह संचालित कर रहा था। अग्रवाल सोया प्लांट वाला दीपक सिंहल और बाबू सिंधी दोनों की संलिप्तता सामने आई है। दीपक सिंहल हरियाणा सोनिपत जेल में डोडाचूरा धोलापाली तस्करी में करीब सवा दो साल की जेल काट चुका है और वह जमानत पर है। दीपक सिंहल मंडी में सफेदपोश का रोल अदा कर रहा था वहीं बाबू के साथ मिलकर तस्करी की गतिविधियों में भी लिप्त् रहा। बताया जा रहा है कि दीपक सिंहल चिकना बाबू के लिए मंडी में पोस्ते की खरीदी करता था और बाद में वह पोस्तादाना से छनाई कर धोलापाली और कालादाना अलग कर बाहर बेचते थे। सवा दो साल के दौरान सोनिपत जेल में बंद रहते हुए दीपक सिंहल ने बडे—बडे तस्करों से संपर्क बना लिए थे और जेल के संपर्क का बाहर आकर बखूबी करने लगा। बीते दो साल के दौरान हरियाणा के तस्करों को डोडाचूरा, धोलापाली और कालादाना पहुंचाने का जिम्मा दीपक सिंहल के था। मंडी में भले ही दीपक सिंहल मंडी कारोबारी होने का ढिंढोरा पिटे, लेकिन वह तस्कर बनकर बाबू के साथ काम कर रहा था। केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो को दीपक सिंहल की भूमिका के बारे में जानकारी लगी है। इधर मंडी के कई कारोबारी, जो बाबू सिंधी के सीधे संपर्क में थे, वे भूमिगत हो गए है, उन्होंने मोबाईल बंद कर लिए है। जल्द ही केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो नीमच मंडी के उन कथित तस्कर व्यापारियों के नाम उजागर करेगा, जो बाबू के साथ मिलकर मंडी व्यापारी का मुखौटा पहनकर तस्करी को अंजाम दे रहे थे।

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