नीमच में बनेगी सीयूजी सिम के साथ विटनेस हेल्प डेस्क।

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न्यायालय में सरकारी गवाहों को अब नहीं भटकना पडे़गा।

नीमच। जिला अभियोजन अधिकारी श्री आर. आर. चौधरी द्वारा बताया गया कि न्यायालय में आपराधिक घटनाओं वाले प्रकरणों में सरकारी गवाहों को भटकना नहीं पडे़गा, उनकी मदद हेतु नीमच जिलें में विटनेस हेल्प डेस्क खोली जा रहीं है। इससे ये गवाह उन्हें बरगलानें एवं गुमराह करने वाले आरोपियों से संबंधित व्यक्तियों/दलालों के झांसे में आने से रोकने के लिए हेल्प डेस्क के माध्यम से उन्हें बताया जाएगा कि उन्हें किस कोर्ट में गवाही हेतु पेश होना है। यह नवाचार पहली बार राज्य के गृह विभाग के अंतर्गत कार्यरत लोक अभियोजन संचालनालय प्रारंभ करने जा रहा है। अभी संचालनालय ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सतना और मैहर में यह सुविधा प्रदान की है तथा इसकी उपयोगिता को देखते हुए अब इसे प्रदेश के हर जिलें में स्थापित किया जा रहा है। इसके लिए लोक अभियोजन संचालनालय ने सभी जिला अभियोजन अधिकारीयों से कहा है कि प्रत्येक जिलें में एक विटनेस हेल्प डेस्क बनाई जाना है। इस डेस्क में जिला अभियोजन कार्यालय के सहायक ग्रेड-03 कर्मचारीं को प्रभारी अधिकारी नामांकित किया जायेगा। इस हेतु जिला अभियोजन अधिकारीयों से उनके कार्यालय के एक सहायक ग्रेड-03 कर्मचारी का नाम मांगा गया है। इस कर्मचारीं को क्लोज यूजर ग्रुप यानी सीयूजी सिम भी आवंटित की जायेगीं। जिला नीमच से श्री सुनील चावला, सहायक ग्रेड-03 का विटनेस हेल्प डेस्क के प्रभारी अधिकारी के रूप में नामांकन भेजा गया है, जल्द इन्हें नामांकित कर सीयूजी सिम प्रदान की जायेगी।
*अब समंस के साथ विटनेस हेल्प डेस्क प्रभारी का सीयूजी नंबर भी होगा* – आपराधीक घटनाओं वाले प्रकरणों में गवाहों को न्यायालय में गवाही देने के लिए पेश होने के लिए जो समंस जारी होगा उसके साथ एक पेपर पर विटनेस हेल्प डेस्क के प्रभारी अधिकारी का सीयूजी नंबर भी होगा। गवाह न्यायालय में जाकर सीधे इस हेल्प डेस्क पर जायेगा, जहॉ प्रभारी अधिकारी उसे बतायेगा कि किस न्यायालय में उसे पेश होना है। इससे गवाह को न्यायालय में इधर-उधर नहीं भटकना पडे़गा और वह आरोपी पक्ष से संबंधित व्यक्तियों/दलालों के झांसे में आने से बच सकेगा।
*इस नवाचार के जनक श्री राजेन्द्र कुमार संचालक, लोक अभियोजन संचालनालय, भोपाल का कहना है कि* – क्राईम रेट इसलिए बढ़ता है, क्योंकि आरोपीयों को सजा नहीं मिल पाती है। विटनेस हेल्प डेस्क से सरकारी गवाह न्यायालय में आसानी से गवाही देने आ सकेगें, भटकने एवं आरोपी पक्ष से संबंधित व्यक्तियों/दलालों के झासे में आने से बचेगें, जिससे प्रॉसिक्युशन रेट बढे़गा। इस डेस्क की सफलता का अांकलन छः माह तक देखा जायेगा और अच्छा प्रतिसाद होने पर शासन सिविल केसो मे ऐसी व्यवस्था करेगा।

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