न्यायालय का आदेश न मानकर कुर्क सम्पत्ति की अमानत में खयानत करने वाले आरोपी को सजा एवं जुर्माना।

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नीमच। सुश्री शीतल बघेल, न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी, नीमच द्वारा एक आरोपी को सुपुर्दगी पर सौपी गई सम्पत्ति को न्यायालय के आदेश का पालन में प्रस्तुत न कर अमानत में खयानत करने के आरोप का दोषी पाकर न्यायालय उठने तक का कारावास एवं 500रू. के जुर्माने से दण्डित किया।
अभियोजन मीड़िया सेल प्रभारी एडीपीओ रितेश कुमार सोमपुरा द्वारा घटना की जानकारी देते हुए बताया कि लगभग 6 वर्ष पूर्व जिला न्यायालय, नीमच द्वारा भगतराम विरूद्ध बापूलाल के सिविल वाद में न्यायालय द्वारा बापूलाल के विरूद्ध 3,22,960रू. की डिक्री पारित की थी। इस डिक्री की रकम की वसुली के लिए न्यायालय का कर्मचारी जब बापूलाल की ग्राम-जीरन स्थित घर पहुॅचा, तब बापूलाल द्वारा उक्त रकम नहीं दिये जाने पर, उसका ट्रेक्टर जप्त कर लिया गया। बापूलाल को जप्तशुदा ट्रेक्टर इस शर्त पर सुपुर्दगी पर दिया गया कि न्यायालय के आदेश पर वह ट्रेक्टर लेकर न्यायालय में उपस्थित होगा। बाद में जब न्यायालय द्वारा बापूलाल को ट्रेक्टर लेकर न्यायालय में उपस्थित होने हेतू नोटिस दिया गया, तो वह न्यायालय के आदेश का पालन न कर ट्रेक्टर लेकर न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ, जिस कारण उसके विरूद्ध पुलिस थाना जीरन में अपराध क्रमांक 230/2012, धारा 406 भादवि के अंतर्गत रिपोर्ट दर्ज की गई, तत्पश्चात् विवेचना उपरांत चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय में विचारण के दौरान अपराध को प्रामाणित किये जाने के लिए कुर्की, जप्ती व सुपुर्दगी करने वाले सभी आवश्यक गवाहों के बयान कराकर आरोपी को दोषी ठहराया गया। सुश्री शीतल बघेल, न्यायिक दण्डिधिकारी प्रथम श्रेणी, नीमच द्वारा आरोपी बापूलाल पिता नंदलाल पाटीदार, उम्र-77 वर्ष, निवासी-पाटीदार मोहल्ला, ग्राम व तहसील जीरन, जिला-नीमच को धारा 406 भादवि (अमानत में खयानत करना) के अंतर्गत न्यायालय उठने तक का कारावास तथा 500रू के जुर्माने से दण्डित किया गया। न्यायालय में शासन की ओर से श्री चन्द्रकांत नाफडे, ए.डी.पी.ओ. द्वारा पैरवी की गई ।

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