पट्टा स्वीकृत किये जाने हेतु 2000रु की रिश्वत मागाने वाले पंचायत सचिव को 4 वर्ष का सश्रम कारावास।

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नीमच। श्री अजय सिंह ठाकुर, विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), नीमच द्वारा ग्राम फोफलिया के पंचायत सचिव को पट्टा स्वीकृत किये जाने हेतु 2000रु की रिश्वत मांगे जाने के आरोप का दोषी पाकर 04 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 4000रू. के जुर्माने से दण्डित किया।

जिला अभियोजन अधिकारी श्री जगदीश चैहान द्वारा घटना की जानकारी देते हुए बताया कि फरियादी कैलाश मालवीय द्वारा दिनांक 01.08.2015 को मुख्यमंत्री आवास हेतु पट्टा स्वीकृत कराये जाने के लिए ग्राम पंचायत फोफलिया के सचिव आरोपी गिरीराज जाट को आवेदन दिया था, तब आरोपी द्वारा पट्टा स्वीकृत किये जाने हेतु अवैध रूप से 2000रु रिश्वत की मांग कि गई थी। फरियादी द्वारा इसकी शिकायत पुलिस अधिक्षक, विपुस्था उज्जैन को की गई। शिकायत के आधार पर लोकायुक्त पुलिस द्वारा आरोपी को रंगे हाथों रिश्वत लेते हुऐ पकडे जाने हेतु ट्रैप दल गठीत किया गया। इसके पश्चात योजना अनुसार दिनांक 06.08.2015 को दिन के 1 बजे फरियादी कैलाश 2000रु रिश्वत आरोपी को देने के लिए पंचायत भवन, ग्राम फोफलिया पहुॅचा जहां पर उसने आरोपी द्वारा मांगे जाने पर 2000रु रिश्वत देकर सर पर हाथ घुमाकर लोकायुक्त पुलिस को ईशारा कर सूचीत किया, तब लोकायुक्त पुलिस द्वारा मौके पर ही आरोपी को फरियादी से 2000रु रिश्वत लेते हुऐ पकड लिया। लोकायुुक्त पुलिस द्वारा आरोपी के विरूद्ध अपराध क्रमांक 353/15, धारा 7, 13(1)(डी), 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के अंतर्गत पंजीबद्ध कर शेष विवेचना उपरांत चालान विशेष न्यायालय, नीमच में प्रस्तुत किया।

अभियोजन की ओर से अपराध सिद्ध करने के लिये फरियादी कैलाश मालवीय, पंचसाक्षी, ट्रैप दल के सदस्यों एवं विवेचक सहित सभी आवश्यक गवाहो के बयान कराकर अपराध को संदेह से परे प्रमाणित कराकर वर्तमान में दीमक की तरह बढती हुई भ्रष्टाचार की बीमारी को खत्म करने के लिये उदाहरणस्वरूप आरोपी को कठोर दण्ड से दण्डित किये जाने का निवेदन किया। श्री अजय सिंह ठाकुर, विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), नीमच द्वारा आरोपी गिरीराज जाट पिता राम नारायण जाट, उम्र-23 वर्ष, निवासी-ग्राम हरवार, थाना जीरन, जिला-नीमच (म.प्र.) को धारा 7, 13(1)(डी), 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 में 4 वर्ष का सश्रम कारावास व 4,000रू. जुर्माना, से दण्डित किया गया, साथ ही फरियादी को 2000रु प्रतिकर प्रदान करने का आदेश भी दिया। न्यायालय में शासन की ओर से पैरवी श्री जगदीश चैहान, डीपीओ द्वारा की गई एवं सहयोग कोर्ट मोहर्रिर लाखन सिंह पंवार का रहा।

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