पीडिता द्वारा बयान से पलटने के बावजूद उसका अपहरण कर दुष्कर्म करने वाले आरोपी को 15 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 7,000रू. जुर्माना ।

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नीमच। श्री पंकज श्रीवास्तव, अपर सत्र न्यायाधीश, नीमच द्वारा एक आरोपी को नाबालिग का अपहरण करके उसके साथ दुष्कर्म करने के आरोप का दोषी पाते हुए 15 वर्ष के सश्रम कारावास एवं कुल 7000रू. के जुर्माने से दण्डित किया।
जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्री आर. आर. चौधरी द्वारा घटना की जानकारी देते हुए बताया कि घटना लगभग एक वर्ष पुरानी होकर दिनांक 18.06.2017 की हैं। पीडिता जिसकी उम्र लगभग 17 वर्ष 06 माह हैं, वह ग्राम-गिरदौडा में रहती हैं, रात्रि के लगभग 09ः30 बजे वह शौच करने घर से बहार गई, तो रास्ते में आरोपी द्वारा शादी करने का झांसा देकर उसका अपहरण कर लिया। पीडिता की माता ने पीडिता के नहीं लौटने पर उसके अपहरण की रिपोर्ट पुलिस थाना नीमच सिटी पर लिखाई, जिस पर से अपराध क्रमांक 284/2017 पंजीबद्ध हुआ। दिनांक 01.07.2017 को पुलिस द्वारा पीडिता को मन्दसौर से दस्तयाब किया गया और आरोपी को गिरफ्तार किया गया। पीडिता द्वारा बताया गया कि आरोपी द्वारा उसको उदयपुर (राजस्थान) ले जाकर उसके साथ बलात्कार किया गया, फिर दो-तीन दिन बाद आरोपी उसको मन्दसौर ले आया। पुलिस द्वारा पीडिता का मेडिकल किये जाने के बाद धारा 363, 366, 376 भादवि तथा धारा 4 पॉक्सों एक्ट में चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
अभियोजन पक्ष द्वारा पीड़िता, उसकी माता, पीड़िता के साथ दुष्कर्म हुआ यह प्रमाणित कराने के लिए उसका मेडिकल करने वाले डॉक्टर तथा पीडिता को नाबालिक प्रमाणित करने के लिए स्कॉलर रजिस्टर प्रस्तुत करने वाले अध्यापक सहित सभी आवश्यक गवाहों के बयान न्यायालय में कराकर आरोपी के विरूद्ध अपराध को संदेह से परे प्रमाणित कराया गया।
प्रकरण में विशेष तथ्य यह हैं कि न्यायालय में मुख्य परीक्षण में पीड़िता ने घटना का समर्थन किया था, किंतु प्रतिपरीक्षण में पीड़िता ने आरोपी को पहचानने से इंकार कर दिया था, इस बिन्दू पर जिला लोक अभियोजन अधिकारी आर. आर. चौधरी द्वारा पीड़िता का पुनः परीक्षण किया गया, जिसमें उसके द्वारा स्वीकार किया गया कि उसने जो बयान मुख्य परीक्षण में दिये थे वही सत्य हैं।
दण्ड के प्रश्न पर अभियोजन की ओर से तर्क रखा गया कि आरोपी द्वारा नाबालिग का शादी का झांसा देकर अपहरण करके उसके साथ दुष्कर्म किया हैं, अतः आरोपी को कठोर दण्ड से दण्डित किया जाये। अभियोजन के तर्को से सहमत होकर श्री पंकज श्रीवास्तव, पॉक्सो एक्ट के विशेष अपर सत्र न्यायाधीश, नीमच द्वारा आरोपी नारायण पिता ओंकारलाल भील, उम्र-21 वर्ष, निवासी-ग्राम हर्कियाखाल, थाना जीरन, जिला नीमच को धारा 363 भादवि (अपहरण करना) में 03 वर्ष का सश्रम कारावास व 2,000रू. जुर्माना, धारा 366 भादवि (दुष्कर्म करने के लिये अपहरण करना) में 05 वर्ष का सश्रम कारावास व 2,000रू. जुर्माना तथा धारा 4 पॉक्सो एक्ट (अव्यस्क के साथ दुष्कर्म करना) में 07 वर्ष के सश्रम कारावास व 3,000रू. जुर्माना, इस प्रकार आरोपी को कुल 15 वर्ष के सश्रम कारावास व 7,000रू. जुर्माने से दण्डित किया गया। प्रकरण में धारा 376 भादवि एवं धारा 4 पॉक्सो एक्ट के अपराध एवं दण्ड की प्रकृति एक समान होने से धारा 4 पॉक्सो एक्ट में आरोपी को दण्डित किया गया। न्यायालय में शासन की ओर से पैरवी जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्री आर. आर. चौधरी द्वारा की गई।

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