मल्हारगढ की काचरिया नो पंचायत में सुदूर सड़क में गड़बड़ झाला ही गड़बड़ झाला लाखों के पौधे खरीदे गए

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जोकि बील में दर्शाया गया है 9484 दिन काम चला190 प्रति मजदूर लगभग तीन लाख के आसपास निकाला गया साथ ही 67000हजार की सीमेंट सुदूर सड़क में लगा रखी है लगे लाखों के बिल जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही

मल्हारगढ़:- प्रधानमंत्री जी लोगो को रोजगार देने की और गरीबो को राहत कोरोना संक्रमण का दंश झेल रहे लोगो को कोरोना कर्फ्यू समाप्ति के बाद मजदूरी के लिए पलायन न करने व उनको मनरेगा के तहत कम से कम 100 दिन का रोजगार मिले इस हेतु देश के ग्रामीण क्षेत्रो की पंचायतों को सुदूर सड़क,वृक्षारोपण जैसे अनेको जनहितकारी कार्यो ले लिए लाखों रुपये दे रहे है और अनेको पंचायतों के सरपंच सचिव और किन्ही लोगो की सरपरस्ती के किस कदर भ्राष्टाचार कर धन कमाने और खुद तो खाये लोगो को खिलाने में लगे है इसकी सीबीआई जांच होगी तो 80 से 90 प्रतिशत सरपँच सचिव जेल में होंगे रातोरात लखपति बनने की चाह में मजदूरों की बजाय मशीनों से कार्य करवा रहे ताकि काम भी जल्दी हो और माल भी मिल जाय अगर मजदूरों से काम कराया तो पैसा नही मिलेगा आज हर जगह मनरेगा के कार्यो को लेकर शिकायत सामने आ रही है मंदसौर जिले में भी कई पंचायतों की शिकायत अधिकारीयो के बस्ते में बंधी है सरपंच सचिव बेख़ौफ़ मनरेगा में मशीन से काम करवाकर नियमो की धज्जियां उड़ा रहे है।
स्थानीय राजनीतिक से मध्यप्रदेश के बड़े बड़े नेताओं को सब मालूम है पर केवल भ्राष्टाचार पर भाषण देते रहते और लोगो की तालियां तो विपक्ष की गालियां बटोरने का काम कर रहे है।
कांग्रेस केवल होहल्ला करना जानती है पर ग्रामीण क्षेत्रो में मनरेगा में हो रहे भ्राष्टाचार के लिए कोई नही बोलना चाहते है आखिर क्यों क्या विपक्ष खामोश क्यो है अब बात करते मंदसौर जिले की मल्हारगढ तहसील की ग्राम पंचायत काचरिया नो में विगत 5 वर्ष फलदार पौधे और वृक्षारोपण का कार्य मनरेगा के तहत करवाया जा रहा है कागजो में सेकड़ो पौधे और लाखों रुपयों का खर्च रिकार्ड में दर्ज है पर जमीनी हकीकत आज तक किसी अधिकारी ने जानने की कोशिश ही नही की है भेसाखेड़ी माता जी मन्दिर ग्राउंड मे बमुश्किल 50 के लगभग पौधे लगे होंगे और खर्च लाखो का हुआ है। वृक्षारोपण के नाम पर भरे जा रहे फर्जी मास्टर ना तो मजदूर है ना ही मजदूरों ने काम किया और जो काम हुआ तो वह भी कुछ अनोखा पास में खाई लगाकर जेसीबी से रोड बना दी गई कई साल और मजदूरों को मिलने वाला कार्य में कुछ ही घंटों में निपटा दिया। कई साल से चल रहे हैं मास्टर आखिर किसकी जेब में जा रहा है पैसा कहीं सचिव सरपंच की मिलीभगत व ग्रामीणों से साठगांठ कर तो नहीं निकाला जा रहा पैसा जांच होगी तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। अब यह देखना कि जिले में बैठे अधिकारी क्या संज्ञान लेते हैं लेकिन सबसे बड़ी बात है कि यदि हर पंचायत में कार्य करने के लिए इंजीनियर नियुक्त है तो आखिर क्या कर रहे हैं इंजीनियर इनकी भी भूमिका पर सवाल उठ रहे है कि कहीं यह भी तो इसमें शामिल तो नहीं बड़ा बड़ा सवाल है मल्हारगढ़ तहसील के की काचरिया नो पंचायत में मनरेगा के तहत हो रहे कार्यों की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। लाखों रुपए केटीएस बनाकर लाखों रुपए की राशि वृक्षारोपण के नाम पर निकाल चुके हैं ।आखिर किसके नाम पर जा रहे हैं यह पैसे जबकि जमीनी हकीकत में मनरेगा के तहत कागजो पर जितने पौधे लगाना बताए उससे आधे भी पौधे वहां पर उपलब्ध नहीं है। बल्कि इसी पंचायत में सुदूर सड़क के नाम पर लाखों रुपए की हेराफेरी की जेसीबी के द्वारा कुछ ही घंटों में कार्य करा कर की गई है। सड़क के किनारों की खुदाई कर मिट्टी रोड पर डालकर मस्टर के नाम पर लाखों रुपए निकाल लिए गए और अभी भी कार्य प्रगति पर आखिरकार यह मनरेगा के पैसा किसकी जेब मे जा रहा है बड़ा सवाल बन बैठा है। लगातार मल्हारगढ तहसील में मनरेगा के कार्य में हो रही हो रही लीपापोती से शासन को तो करोड़ो रुपए का चूना लग रहा है। लेकिन गरीबों का हक भी मारा जा रहा है क्या वरिष्ठ अधिकारी मनरेगा कार्यों की जांच के लिए कोई दल गठित कर पंचायतों में चल रहे मनरेगा कार्यों की वास्तविक स्थिति की जांच करवा कर दूध का दूध और पानी का पानी करेगा या यही भ्रष्टाचार की भेंट मनरेगा के कार्य चढ़ते रहेंगे और अधिकारी केवल कागज खानापूर्ति करके मुंह देखते रहेंगे।

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