मिलावटी घी बेचने वाले को 01 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 3,000रू. जुर्माना ।

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नीमच। श्री नीरज मालवीय, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी, नीमच द्वारा एक आरोपी को मिलावटी घी बेचने के आरोप का दोषी पाते हुए 01 वर्ष के सश्रम कारावास और 3,000रू. के जुर्माने से दण्डित किया गया।
अभियोजन मीड़िया सेल प्रभारी एडीपीओ रितेश कुमार सोमपुरा द्वारा घटना की जानकारी देते हुए बताया कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में पदस्थ खाद्य निरीक्षक राजू सोलंकी दिनांक 21.12.2009 को शाम के लगभग 5 बजे निरीक्षण हेतु फर्म-गुरलदास बेढोमल, पटेल की चाल, नीमच पहुचे जहॉ पर फर्म में तेल, घी, शक्कर आदि सामग्री का विक्रय किया जा रहा था। खाद्य निरीक्षक राजू सोलंकी द्वारा निरीक्षण के दौरान बेचने के लिए फर्म में रखे मिल्क क्रीम प्योर घी के 200 एम.एल. के 3 पैकेटे नमूना जॉच हेतु 51 रूपये नकद भुगतान कर लिये तथा फर्म के मालिक का नाम पूछे जाने पर उसने अपना नाम आशोक सिंधी बताया जिसके पास दुकान का वर्ष 2009-2010 का वैध लाईसेंस भी नही था। खाद्य निरीक्षक द्वारा घी की जॉच लोक विश्लेषक, राज्य खाद्य प्रयोगशाला, भोपाल से करायी, जिसमें घी मिलावटी होकर मानव स्वस्थ्य के लिए हानिकारक होना बताया। इसके पश्चात् आरोपी के विरूद्ध मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी, नीमच के न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय में अपराध को प्रामाणित किये जाने हेतू संबंधित खाद्य निरीक्षक एवं अन्य आवश्यक गवाहों के बयान कराये गये तथा यह तर्क रखा गया कि लोक विश्लेषक, राज्य खाद्य प्रयोगशाला, भोपाल की रिपोर्ट से यह स्पष्ट हैं कि आरोपी द्वारा जो घी बेचा जा रहा था वह मिलावटी था तथा विक्रय दिनांक को आरोपी के पास लाईसेंस भी नही था। अभियोजन साक्ष्य एवं तर्को से सहमत होते हुए आरोपी को न्यायालय द्वारा मिलावटी घी विक्रय करने का दोषी ठहराया गया। दण्ड के प्रश्न पर अभियोजन की ओर से न्यायालय में तर्क किया गया कि आरोपी द्वारा मानव स्वास्थ के लिए हानिकारक मिलावटी घी विक्रय किया जा रहा था, अतः आरोपी को कठोर दण्ड से दण्डित किया जाना चाहिए। अभियोजन के तर्को से सहमत होकर श्री नीरज मालवीय, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दण्डिधिकारी, नीमच द्वारा आरोपी अशोक कुमार पिता गोरलदा सिंधी, उम्र-43 वर्ष, निवासी-सिंधी कॉलोनी, नीमच को धारा 7/16 एवं नियम 50 खाद्य अपमिश्रण अधिनियम, 1954 के अंतर्गत 06-06 माह के सश्रम कारावास एवं 1500-1500 रू. के जुर्माने से इस प्रकार कुल 01 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 3,000 जुर्माने से दण्डित किया गया। न्यायालय में शासन की ओर से जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्री आर. आर. चौधरी के मार्गदर्शन में श्रीमती निधि शर्मा, एडीपीओ द्वारा पैरवी की गई।

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