रेमडिसिवर के मुनाफाखोरों को गिरफ्तार किया जाकर रासुका लगाई जाए

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इंदौर। कोरोना के सबसे कारगर इलाज रेमडेसिवीर इंजेक्शन की कीमत को नियंत्रित किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार डीपीसीओ (ड्रग प्राइस कंट्रोल आर्डर) के तहत रेमडेसिवीर इंजेक्शन को भी ले, ताकि कोरोना संक्रमितों को ये दवा सरकार द्वारा निर्धारित कीमत पर एमआरपी पर मिल सके। अभी ये इंजेक्शन छह गुना एमआरपी पर मिल रहे हैं*।

खनिज निगम के पूर्व उपाध्यक्ष गोविंद मालू ने केंद्र सरकार से यह मांग करते हुए कहा कि जिस तरह दिल की बीमारियों के लिए सरकार ने डीपीसीओ के तहत स्टंट और घुटना प्रत्यारोपण के लिए जरुरी उपकरण की कीमतें नियंत्रित की है, उसी तरह रेमडेसिवीर इंजेक्शन को भी इस सूची में शामिल किया जाए। इस संबंध में श्री मालू ने केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री श्री सदानंद गौड़ा और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री हर्षवर्धन को पत्र लिखा है और फोन पर चर्चा भी की।
श्री मालू ने कहा कि नेशनल फार्मा प्राइस अथॉरिटी (एनपीपीए) डीपीसीओ के तहत जल्द से जल्द इस सम्बन्ध में कार्रवाई करे। देश में 6 दवा कंपनियां रेमडेसिवीर इंजेक्शन बनाती है और 4800 से 5400 रुपए कीमत पर इसे बेचती हैं। जबकि, इसकी वास्तविक कीमत 899 से 1200 रुपए के बीच है।
श्री मालू ने कहा कि से ज्यादा कीमत पर बेचने के साथ इसका कृत्रिम अभाव भी उत्पन्न करके इसकी कालाबाजारी भी जमकर हो रही है, इस पर प्रदेश के प्रशासन को कड़ी कार्रवाई करना चाहिए ।
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में फिलहाल रोज 10 हज़ार रेमडेसिवीर इंजेक्शन की जरूरत है, जिसमें आधे से ज्यादा इंजेक्शन की मांग इंदौर और भोपाल में है। इंदौर भोपाल के कई निजी अस्पताल मरीजों को बीमारी बढ़ने का भय दिखाकर रेमडेसिवीर इंजेक्शन महँगी कीमत बढ़ी MRP पर बेच रहे हैं, इन्हें गिरफ्तार किया जाए, इन पर रासुका लगाई जाए।
गोविंद मालू ने कहा कि कोरोना की भयावहता को देखते हुए ‘ड्रग प्राइस कंट्रोल आर्डर’ लागू कर इस दिशा में शीघ्र कार्रवाई करना चाहिए। आपने मुख्यमंत्री जी से भी केंद्रीय मंत्रियों से अपने प्रभाव का उपयोग करते हुए इस मांग को पूरा करवाने का आग्रह किया
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