शहर में डेंगू का आतंक- जिम्मेदार विभाग नींद में-मात्र कागजी कार्यवाही पूरी करने तक सीमित

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नीमच। शहर में डेंगू का आतंक इतना बड़ चुका है कि लोग अब कोरोना के बाद डेंगू बीमारी के डर से दहशत में जीने लगे है। हालात बिगड़ने के बाद भी जिम्मेदार विभागो की नींद नहीं उड़ रही है। हालात ये हो रहे है कि जानकारी के बाद भी ना तो मच्छर नाशक दवाई का छिड़काव किया जा रहा है और ना हीं डेंगू पीड़ित के क्षेत्र में सर्वे कर पीड़ित परिवार व आसपास के रहवासियों हेतु सुरक्षात्मक कदम उठाये जा रहे है।
शहर में डेंगू का खौफ निरंतर बड़ता जा रहा है जागरूक लोगो के द्वारा जिम्मेदार विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को सोशल मीडिया, समाचार पत्रों, इलेक्ट्रानिक मीडिया सहित पत्राचार कर जगाने का प्रयास किया जा रहा है उसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी पर झूं तक नहीं रेंग रही है जिससे हालात बद से बदतर होते जा रहे है। बात करे इन्दिरा नगर के समीप गणपति नगर की तो इस क्षेत्र के रहवासी मनीष चान्दना ने बीते कई दिनों से स्वास्थ्य विभाग व नगरपालिका विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को समाचार पत्रों सहित मौखिक रूप से व अन्य रूप से गणपति नगर में मलेरिया और डेंगू बीमारी को लेकर आगाह करने का काम करते आ रहे थे लेकिन अनदेखी से हालात ये हुए कि गणपति नगर में भी डेंगू पॉजिटिव मरीज आ गया। मनीष चान्दना ने जब इस संबंध में नपा अधिकारी श्याम टांकवाल से बात की तो उन्होने क्षेत्र में मच्छर नाशक दवाई का छिड़काव तो करवा दिया लेकिन सार्वजनिक कुआं जिसमें पानी बहुत है वहां पनपने वाले डेंगू लार्वा के नष्टीकरण की दवाई अभी तक नहीं डाली गई। इस क्षेत्र में नगरपालिका व स्वास्थ्य विभाग के डेंगू व मलेरिया को लेकर क्या कार्य है रहवासी इससे अंजान है पर दोनो विभागो को अपने अपने कार्य तो करना ही चाहिये लेकिन उनके द्वारा ईमानदारी से अपने कर्तव्य का निर्वहन नहीं किया जा रहा है। वहीं क्षेत्र में खाली पड़े प्लाटों में भारी मात्रा में उग रही गाजर घास व गढ्ढों में एकत्रित पानी के लिये भी जिम्मेदारों के द्वारा कोई कार्यवाही नहीं करने से क्षेत्र में डेंगू व मलेरिया कोरोना बीमारी जैसा रूप ले सकता है।
स्वास्थ्य विभाग का अमला जगाने के बाद भी नहीं जागता-
स्वास्थ्य विभाग का अमला ऐसा है उसे जगाने के बाद भी वह नहीं जगता है। स्वास्थ्य विभाग के पास निजी लेब की जानकारी भी पहुंचती है लेकिन हालात ये हो रहे है कि निजी लेब में डेंगू पॉजिटिव आने वाले पीड़ित के क्षेत्र में सर्वे करने पर भी स्वास्थ्य विभाग का अमला नहीं पहुंच रहा है वहीं डेंगू का लार्वा नहीं पनपे इस हेतु भी दवाई का छिड़काव की कार्यवाही नहीं देखी जा रही है। इस संबंध में क्षेत्र के रहवासी मनीष चान्दना ने बताया कि डेंगू पीड़ित के क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग के अमले को सर्वे कर पीड़ित मरीज व उसके परिजनों का सेम्पल भी लेकर उसकी भी जॉच करवाना चाहिये या जॉच के लिये प्रेरित करना चाहिये वहीं पीड़ित के पास स्थित घरो में निवासरत लोगो की जांच भी एहतियात के तौर पर करवाना चाहिये लेकिन ऐसा होता नहीं दिखता है। स्वास्थ्य विभाग के व नगरपालिका के डेंगू व मलेरिया बीमारी को लेकर क्या नियम है यह सार्वजनिक करना चाहिये।
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लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को गंभीरता लेवें सभी विभाग-
मनीष चान्दना ने बताया कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले समाचार पत्रों, इलेक्ट्रानिक मीडिया संस्थानों आदि के द्वारा निरंतर शहर सहित आसपास क्षेत्रों की समस्याओं से खासकर वर्तमान में डेंगू और मलेरिया को लेकर नगरपालिका व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को जगाने का कार्य करती आ रही है लेकिन हालात देखों कि समाचार प्रकाशित होने के बाद जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों को कोई मतलब नहीं दिखता। कलेक्टर परिसर में जनसम्पर्क विभाग है बताया जाता है कि जो जिस विभाग की समस्याएं होती है उस विभाग को जनसम्पर्क विभाग उस समस्या की अखबार की करतने भेजता है वहीं जिला कलेक्टर को भी प्रतिलिपि भेजी जाती है उसके बाद भी कई जगहों पर देखने में आता है कि समाचार पत्रों में समस्याएंं छपने के बाद भी हल होती नजर नहीं आती है। मनीष चान्दना ने जिला कलेक्टर को इस समाचार के माध्यम से संज्ञान लेने की बात कहते हुए कहा कि समाचार पत्रों सहित इलेक्ट्रानिक मीडिया में यदि किसी क्षेत्र की समस्या प्रकाशित हो तो उस पर संबंधित विभाग के अधिकारी-कर्मचारी समाचार प्रकाशित होने वाले दिन ही समस्याओं को गंभीरता से लेकर हल करेंगे तो कई समस्याओं को निदान तुरंत हो ही जायेगा। क्यों कि बीते कई दिनों से मीडिया में कई क्षेत्रों में डेंगू व मलेरिया को लेकर जिम्मेदार विभागों सहित प्रशासन में बैठे अधिकारियों को डेंगू व मलेरिया बीमारी को लेकर मच्छर नाशक दवाई के छिड़काव करने सहित अन्य उचित कदम उठाने हेतु आगाह करते आ रहा है लेकिन जिस प्रकार से अनदेखी बरती जा रही है उससे डेंगू के मरीज बड़ते जा रहे है जो चिंतनीय है।

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