श्रीमती मधु बंसल ने उठाया मुद्दा : चर्मशोधन केंद्र और टायर फैक्ट्री से 15 गांवों के लोग प्रभावित, नीमच में भी आ रहा जहरीला पानी

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मेन हेडिंग….

प्रतिबंध के बाद भी जहर घोल रही फैक्ट्रियां

सब हेडिंग….
खुलासा: मानव स्वास्थ्य के अलावा भूमि, जल एवं वायु प्रदूषण का कारण बन गई है यह फैक्ट्रियां

नीमच। भड़क सनावदा-हर्कियाखाल नाले से लगे चर्मशोधन केंद्र व टायर पायरोलिसिस यूनिट भयावह प्रदूषण के कारण बन रहे हैं। इनके कारण आस-पास के करीब 15 गांवों के रहवासियों के स्वास्थ्य पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है। दोनों कारखानों से निकलने वाला केमिकल युक्त अपशिष्ट हर्किया खाल के माध्यम से बारिश के दौरान जाजू सागर बांध में आकर मिल रहा है। जहां का पानी नीमच शहर को पेयजल के रूप में प्रदाय किया जा रहा है। जिसका शहरवासियों के स्वास्थ्य पर भी विपरीत असर पड़ रहा है।
यह गंभीर मुद्दा श्रीमती मधु बंसल, जिला पंचायत सदस्य एवं कार्यकारी अध्यक्ष जिला कांग्रेस कमेटी ने उठाया है। उन्होने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री मप्र, प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस कमेटी कमलनाथजी एवं कलेक्टर नीमच को लिखे पत्र में बताया है कि ग्राम कराडिया महाराज के पास शासकीय भूिम पर हस्थापित चर्मशोधन केंद्र और ग्राम चीताखेड़ा में सर्वे नम्बर 1209/1/9 पर टायर पायरोलसिस यूनिट लगी हुई है। इन दोनों कारखानों से निकलने वाले अपशिष्ट, जहरीले धुआं और बदबू के कारण लोगों का सांस लेना दुर्भर हो गया है। दोनों ही कारखाने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्धारित मानकों के अनुसार नहीं चल रहे हैं।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जारी कर चुका हैं फैक्ट्री बंद करने के आदेश:-
श्रीमती बंसल ने बताया कि ग्रामीण फैक्ट्रियों से प्रदूषण की अनेक बार शिकायतें कर चुके हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्रीय अधिकारी मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उज्जैन द्वारा अपने प्रतिवेदन क्रमांक 1605 दिनांक 29 अक्टूबर 2018 को टायर फैक्ट्री को बंद करने के आदेश जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद फैक्ट्री चल रही है, जो मानव स्वास्थ्य के साथ ही भूमि, जल एवं वायु प्रदूषण के मामले में खतरनाक है।

अब तक हो चुकी है 15 से अधिक लोगों की मौतें:-
श्रीमती बंसल ने बताया कि ग्राम भ्रमण के दौरान मुझे नागिरकों ने अवगत कराया कि इन फैक्ट्रियों के धुंआ और केमिकल युक्त अपशिष्ट की बदबू से सांस लेने में दिक्कत आती है। प्रदूषण के कारण गांवों में दमा-श्वास रोगी एवं एलर्जी पीड़ितों की संख्या बढ़ गई है। दो वर्ष में करीब 15 लोग दमा-श्वास रोग के कारण ही असमय अपना जीवन गंवा चुके हैं।

इन गांवों के लोगों को आ रही परेशानी:-
श्रीमती बंसल ने बताया कि ग्राम कराड़िया महाराज, बमोरा, बमोरी, सोकड़ी, सोनियाना, ग्वाल तालाब, रामनगर, तिकी रूंडी, चीताखेड़ा, नायन खेड़ी, आसपुरा एवं पीठ के रहवासी इन फैक्ट्रियों के कारण बेहद परेशान हैं। चर्मशोधन केंद्र एवं टायर पायरोलिसिस यूनिट के आस पास के इन गांवों में 70 फीसदी लोग दमा, श्वास में परेशानी, दुर्गंध एवं चर्म रोगों से परेशान हैं।

यह है प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रीपोर्ट:-
श्रीमती बंसल ने बताया कि क्षेत्रीय अधिकारी मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उज्जैन द्वारा अपने प्रतिवेदन क्रमांक 1605 दिनांक 29 अक्टूबर 2018 में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि फैक्ट्री को तत्काल बंद करें, क्योंकि यह जल, वायु और भूमि प्रदूषण कर रहे हैं। प्रतिवेदन में मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी पीके त्रिवेदी ने लिखा है कि जल प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण अधिनियम 1974 की धारा 33-क एवं वायु प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण अधिनियम 1981 की धारा 31-क में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए उद्योग संचालक एवं स्वामी सहित समस्त जिम्मेदारों को निर्देश दिया गया है कि वे उत्पादन बंद कर दें। आश्चर्य है कि इन सब के बाद भी यूनिट स्वामी द्वारा जनरेटर के माध्यम से ईकाई को संचालित किया जा रहा है। जबकि स्वास्थ्य की दृष्टि से यह बहुत गंभी मामला है।

ग्रामीण दे चुके हैं ज्ञापन, ग्रापं ने भी नहीं दी एनओसी:-
श्रीमती बंसल ने बताया कि इन फक्ट्रियों के दुष्प्रभाव को लेकर ग्रामीण कलेक्टर नीमच को ज्ञापन सौंप चुके हैं। ग्राम पंचायत चीताखेड़ा एवं ग्राम पंचायतायत कराड़िया महाराज की ओर से भी इन्हे बंद कराने के आवेदन कलेक्टर को दिए गए हैं। यही नहीं पंचायत राज अधिनियम के तहत ग्राम पंचायतें स्वायत्त संस्था है। जिसके तहत पंचायत क्षेत्र में फैक्ट्री लगाने के लिए ग्राम पंचायत की एनओसी आवश्यक होती है। ग्राम पंचायत चीताखेड़ा एवं ग्राम पंचायत कराडिया महाराज द्वारा इन फैक्ट्रियों को कोई एनओसी नहीं दी गई है। फिर भी जन स्वास्थ्य से खिलवाड़ का काम बेरोकटोक जारी है।
.. तो करेंगे आंदोलन:-
श्रीमती बंसल ने कहा कि ग्रामीणों नीमच शहर वासियों के स्वास्थ्य के लिहाज से यह गंभीर मसला है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सात दिवस में यह फैक्ट्रियां बंद नहीं की गई तो ग्रामीणों को साथ लेकर धरना आंदोलन किया जावेगा।

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