समंदर पटेल को क्यों पसंद कर रही है जनता और सकलेचाजी को क्यों नकार रही है ? आइए जानते हैं।

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समंदर पटेल जो कि बीते 10 सालों से क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे नीमच जिले चुनाव लड़ रहे सभी उम्मीदवारों में सबसे ज्यादा लोकप्रिय व साफ छवि के उम्मीदवार है अपने मधुर एवं सौम्य व्यवहार के कारण आमजन में लोकप्रिय है। इंदौर में जावद निवासियों के शिक्षा प्राप्त कर रहे बालक/बालिकाओ एवं हर आम व खास के सुख दुख में काम आते है। बड़े रूप से सम्पन्न होने के बावजूद सबका सम्मान करना एवं अपने से बड़ो को धोग लगाना इनकी कार्यशैली का हिस्सा है। कांग्रेस ने इनको टिकट नहीं दिया तो बागी होकर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। इन्हें इनकी कार्यशैली के कारण जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है। टिकट नहीं मिलने से भी लोगों में इनके प्रति सहानुभूति है और जो रुझान मिल रहे हैं उससे लगता है कि यह भी चुनावी वैतरणी को पार कर सकते हैं। जीत का सेहरा इनके सिर पर भी बंध सकता है।
इनके अलावा अब हम भाजपा प्रत्याशी ओमप्रकाश सकलेचा की बात करते हैं तो वह 15 साल से विधायक हैं। परंतु सत्ताधारी पार्टी भाजपा से जुड़े होने के बावजूद विधानसभा क्षेत्र जावद में कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं कर पाए है। यह पहले चुनाव से ही रोजगार देने का ढिंढोरा पीट रहे हैं परंतु बीते 15 सालों में 15 लोगों को भी रोजगार नहीं दिला पाये है। बड़ी बड़ी बातें करना, बड़ी-बड़ी डींगे हांकना उनकी कार्यशैली का हिस्सा है। आम जनता से सीधे मुंह बात नहीं करना, उलूल जुलूल जवाब देना इनका शगल बना हुआ है। आर्थिक सांठगांठ के चलते अधिकारियों का पक्ष लेना और आम जनता को हड़काना भी उनकी कार्यशैली का हिस्सा है। इस कारण इस बार जनता भी लगभग इनसे ऊब चुकी थक चुकी है। जनता अब बदलाव चाहती है। और जब जनता ठान लेती है तो राजा से रंक बना कर छोड़ती है और फिर कोई कुछ नहीं कर पाता है। इस बार तो सकलेचाजी के चुनाव कार्यालय भी खाली पड़े हैं। भाजपा के निष्ठावान कार्यकर्ता कोई तवज्जो नहीं दे रहे हैं। जो चुनिंदा लोग काम कर रहे उनमे भी कुछ लोग तो पार्टी के कारण मन मारकर मुँह दिखाई कर रहे है, पर इनकी संख्या भी हर जगह उंगलियों पर गिनने लायक है। हाँ चमचे व दलाल किस्म के लोग जिन्होंने सत्ता की मलाई खूब चाटी है, उनमे जरूर जोश दिखाई दे रहा है। परंतु जिस तरह के रुझान मिल रहे हैं, इससे अब यह फटाका फुस्स होता दिखाई दे रहा है। सकलेचाजी तीसरे पायदान पर जाते दिखाई दे रहे हैं और जमानत जप्त की ओर अग्रसर हैं। देखना है क्या होता है।

अब जावद की जनता ने तय कर लिया है कि ट्रेक्टर ही चलाना है

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