7 वर्षीय मूकबधिर बच्ची से अश्लील हरकत करने वाले 80 वर्षीय आरोपी को 13 वर्ष का सश्रम कारावास।

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नीमच। श्री विवेक कुमार, विशेष सत्र न्यायाधीश (पॉक्सों एक्ट), नीमच द्वारा 7 वर्षीय मूकबधिर बच्ची से अश्लील हरकत करने के आरोप का दोषी पाकर एक 80 वर्षीय वृद्ध आरोपी को विभिन्न धाराओ में कुल 13 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 15,000रू. जुर्माने से दण्डित किया।

घटना का विवरण – विशेष लोक अभियोजक श्री जगदीश चौहान द्वारा घटना की जानकारी देते हुए बताया कि नाबालिग पीडिता 7 वर्ष की होकर मूकबधिर हैं, जो बोलने में असमर्थ हैं तथा रेडक्रास, नीमच में पढ़ाई करती हैं। वह ग्राम जावी स्थित उसके घर पर मौसर के कार्यक्रम में आई हुई थी। 80 वर्षीय आरोपी गिरधारीलाल भी मौसर के कार्यक्रम में सम्मिलित होने आया हुआ था, दिनांक 19.10.2019 को शाम 4 आरोपी ने चारपाई पर बैठकर पीडिता को उसके पास बुलाया और बुरी नियत से पीडिता का हाथ पकडकर उसकी धोती के अंदर डालकर उसके गुप्तांगों से बार-बार टच करवाने लगा व पीडिता को उसकी बाहो में भर लिया। मौके पर ही पीडिता के भाई ने आरोपी की हरकत का वीडियों बना लिया था। पीडिता की माता की नजर पड़ी तो वह पीडिता को उठाकर ले गई। पीडिता की माता ने विडियो उसके पति, देवर व देवरानी को बताया। इस घटनाक्रम में देर रात हो जाने के कारण दुसरे दिन पीडिता की माता ने आरोपी के विरूद्ध पुलिस थाना नीमच सिटी में रिपोर्ट लिखाई, जिस पर से आरोपी के विरूद्ध अपराध क्रमांक 465/19, धारा 354 भादवि एवं धारा 9(एम)/3, 9(के)/10 पॉक्सों एक्ट, 2012 व धारा 92 दिव्यांग अधिनियम, 2016 में अपराध पंजीबद्ध किया गया।

प्रकरण सनसनीखेज चिन्हित किया गया – 7 वर्षीय मूकबधिर बालिका के साथ 80 वर्षीय वृद्ध द्वारा किये गये ऐसे कृत्य को देखते हुए समाज पर पड़ने वाले इसके गंभीर प्रभाव को ध्यान में रखते हुए शासन द्वारा इस प्रकरण को जघन्य एवं सनसनीखेज प्रकरण के रूप में चिन्हित किया गया तथा घटना दिनांक से 19 दिवस के भीतर विवेचना पूर्ण कर चालान विशेष न्यायालय नीमच में प्रस्तुत कर दिया गया।

पीडिता की साक्ष्य – प्रकरण के विचारण के दौरान पीडिता मूकबधिर होकर वह बोलने में असमर्थ होने से न्यायालय के समक्ष उसकी साक्ष्य एक विशेष इंस्ट्रक्टर के माध्यम से ली गई, जिसके द्वारा पीडिता द्वारा किये गये ईशारो का अनुवाद किया गया। इसके अतिरिक्त अभियोजन द्वारा पीडिता की माता, घटना का विडियो बनाने वाले उसके भाई एवं अन्य साक्षीयो के बयान कराये तथा साथ ही घटना के संबंध में बनाया गया विडियो भी न्यायालय के समक्ष चलाया, जिसमें आरोपी पीडिता के साथ अश्लील कृत्य करता हुआ दिखा। इस प्रकार आरोपी द्वारा किये गये अपराध को अभियोजन द्वारा न्यायालय में संदेह से परे प्रमाणित कराया गया।
प्रकरण का शीघ्र निराकरण – घटना की गंभीरता को देखते हुए विशेष न्यायालय द्वारा प्रकरण का शीघ्र विचारण करते हुए मात्र 2 माह 21 दिन के भीतर फैसला सुनाकर आरोपी को दण्डित कर पीडिता को न्याय प्रदान तो किया ही हैं, साथ ही समाज के लोग इस प्रकार के अपराधो से दूर रहे ऐसा संदेश भी दिया हैं।

ऐसे घृणित अपराध पर विशेष न्यायाधीश की सख्त टिप्पणी- श्री जगदीश चौहान, विशेष लोक अभियोजक द्वारा 80 वर्षीय वृद्ध द्वारा 7 वर्षीय पीडिता के साथ ऐसा घृणित अपराध करने वाले आरोपी को कठोर दण्ड से दण्डित किये जाने का निवेदन किया, ताकि ऐसे अपराधो के लिए समाज में भय का वतावरण निर्मित हो सके।

इससे सहमत होते हुए विशेष न्यायाधीश श्री विवेक कुमार द्वारा पारित निर्णय में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि – यह अदालत 80 वर्ष से ऊपर के एक वृद्ध द्वारा 07-08 वर्ष की मूकबधिर बच्ची के साथ गुरूत्तर लैंगिक हमला करने के कृत्य से बेहद स्तब्ध है। यह आत्मा को झकझोर देने वाली बात हैं कि एक दिव्यांग बच्ची के साथ अन्य लोगों की मौजूदगी में ऐसी घटना अंजाम में लायी गयी और घटनास्थल पर मौजूद लोग इस घटना के प्रति असंवेदनशील रहे। 21वीं सदी में सभ्य समाज के मध्य यह द्रोपदी के चीरहरण जैसा कृत्य हैं, जिसमें एक 80 वर्षीय बुजुर्ग जिनको समाज में आदर की दृष्टि से देखा जाता हैं, दुर्योधन जैसा घृणित कृत्य करने में लिप्त हैं। अब वक्त है कि हमें ऐसे दिव्यांग व्यक्तियों के बारे में अपने दृष्टिकोण को परिवर्तित करना चाहिए और हमारी संवेदना उन दिव्यांग लोगों के साथ मानवीय होनी चाहिए, क्योंकि वे भी इंसान है। दिव्यांग बोल व सुन नहीं सकते, किंतु उन्हें भी अपने शरीर के प्रति वही सारे अधिकार प्राप्त हैं जो एक आम इंसान को होते हैं।
आरोपी को दण्ड व पीडिता को प्रतिकर – आरोपी गिरधारीलाल पिता रूपा मेघवाल, उम्र-80 वर्ष, निवासी-मोडीमाता, थाना जावद, जिला नीमच को धारा 354 भादवि में 5 वर्ष का सश्रम कारावास व 5,000रू. जुर्माना, धारा 9(एम)/3, 9(के)/10 पॉक्सों एक्ट, 2012 में 5 वर्ष का सश्रम कारावास व 5,000रू. जुर्माना व धारा 92 दिव्यांग जन अधिकार अधिनियम, 2016 में 3 वर्ष का सश्रम कारावास व 5,000रू. जुर्माना, इस प्रकार आरोपी को कुल 13 वर्ष के सश्रम कारावास और 15,000रू. जुर्माने से दण्डित किया, सभी सजाएॅ साथ में चलेगी। इसके अतिरिक्त न्यायालय द्वारा आरोपी पर आरोपित की गई जुर्माने की राशि 15,000रू. पीडिता को प्रतिकर के रूप में प्रदान किये जाने का आदेश दिये जाने के साथ ही विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से पीडिता को म.प्र. पीडित प्रतिकर योजना, 2015 के अंतर्गत उसके पुनर्वास के लिए अतिरिक्त प्रतिकर प्रदान करने को कहा गया।
विशेष योगदान – प्रकरण जघन्य एवं सनसनीखेज चिन्हित होने से श्री पुरूषोत्तम शर्मा, पुलिस महानिदेशक/संचालक लोक अभियोजन (म.प्र.) भोपाल द्वारा इसकी समीक्षा की जा रही थी व मार्गदर्शन दिया जा रहा था। न्यायालय में शासन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजन श्री जगदीश चौहान द्वारा की गई तथा श्री राकेश कुमार सगर, पुलिस अधीक्षक, नीमच के मार्गदर्शन में विवेचना निरीक्षक एन. एस. ठाकुर द्वारा की गई थी ।

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